Saturday, October 10, 2020

मानसिक बीमारी (Mental disorder)

 मानसिक बीमारी (Mental disorder)

* मानसिक स्वास्थ्य विकार विश्व भर में होने वाली सामान्य बीमारियों में से एक है

* मनोविकार किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य की वह स्थिति है जिसे किसी स्वस्थ व्यक्ति से तुलना करने पर 'सामान्य' नहीं कहा जाता

* विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानसिक विकारों से पीड़ित व्यक्तियों की अनुमानित संख्या 450 मिलियन है

* भारत में लगभग 1.5 मिलियन व्यक्ति जिनमें बच्चे एवं किशोर भी शामिल है, गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हैं

* मानसिक बीमारी व्यक्ति के महसूस, सोचने एवं काम करने के तरीके को प्रभावित करती है

* यह रोग व्यक्ति के मनोयोग, स्वभाव, ध्यान और संयोजन एवं बातचीत करने की क्षमता में समस्या पैदा करता है अंततः व्यक्ति असामान्य व्यवहार का शिकार हो जाता है

* इसके कारण दैनिक जीवन के कार्यकलापों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता हैं

* भारत सरकार ने देश में मानसिक बीमारी के बढ़ते बोझ पर विचार करने के उद्देश्य से वर्ष 1982 में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) की शुरूआत की थी

* विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) पूरे विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने के लिए प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है

* मानसिक बीमारी के मूल कारण

> परिवेश संबंधी तनाव जैसे कि चिंता, अकेलापन, साथियों का दबाव, आत्मसम्मान में कमी, परिवार में मृत्यु या तलाक

> दुर्घटना, चोट, हिंसा एवं बलात्कार से मनोवैज्ञानिक आघात होना

> आनुवंशिक असामान्यताएं

> मस्तिष्क की चोट/दोष

> अल्कोहल एवं ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन

> संक्रमण के कारण मस्तिष्क की क्षति

* यह सबसे बड़ी गलत धारणा है कि मानसिक विकारों से पीड़ित व्यक्ति जनता के लिए हिंसक एवं खतरनाक होते हैं इस तरह का नकारात्मक रवैया एवं ग़लतफ़हमी के परिणामस्वरूप मानसिक विकारों से पीड़ित व्यक्ति समाज से अधिक दूर हो जाते हैं

* मानसिक विकार से पीड़ित व्यक्तियों का प्रभावी ढंग से संवाद न करने की क्षमता के कारण, उनका संपूर्ण समाज के साथ-साथ सामान्य जनता पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है लेकिन मानसिक विकार से पीड़ित व्यक्ति जन-जागरूकता एवं सामाजिक सहयोग से इन भ्रांतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकता है

* पीड़ित व्यक्ति से व्यवहार

> उनकी भावनाओं एवं स्वभाव को समझें तथा उनके साथ प्रभावी ढ़ंग से संवाद करने का प्रयास करें

> उन्हें भावनात्मक एवं सामाजिक सहयोग दें

> उनके साथ धैर्यपूर्वक व्यवहार करें तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ावा देने में सहयोग करें

> उन्हें रचनात्मक एवं मनोरंजक गतिविधियों जैसे कि पढ़ने, खेलने, घूमने, योग व ध्यान एवं यात्रा में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें

> उन्हें नया सीखने एवं नयी रुचियाँ विकसित करने में प्रेरित करें

> उनमें जीवन के प्रति सकारात्मक सोच एवं रवैया पैदा करें

> अपने दैनिक कामकाजों से समय निकालकर उनकी सहायता करें

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