Saturday, October 17, 2020

राष्ट्रीय_सुरक्षा_गार्ड

 #राष्ट्रीय_सुरक्षा_गार्ड

#३६वां_स्थापना_दिवस
#१५_अक्टूबर_२०२०
३६ साल से सर्वत्र, सर्वोत्तम सुरक्षा में तैनात NSG कमांडो, देश को है नाज ❤️🇮🇳🙏
एनएसजी का मूलमंत्र " सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा"
कमांडोज एनएसजी को नेवर से गिव अप भी कहते है , लेकिन ब्लैक कैट कमांडो बनना कोई आसान काम नहीं है। काली वर्दी और बिल्ली जैसी चपलता के चलते इन्हे ब्लैक कैट कमांडो कहा जाता है। हर किसी को ब्लैक कैट कमांडो बनने का मौका नहीं मिलता है,इसके लिए पैरा मिलिट्री या पुलिस में होना जरुरी है..आर्मी से ३ और पैरा मिलिट्री से ५ साल के लिए जवान कमांडो ट्रेनिंग के लिए आते है । २६/११ मुंबई हमलों के दौरान एनएसजी की भूमिका को सभी ने सराहा था।
देश की नौ स्पेशल फोर्सेज में से एक नेशनल सिक्योरिटी गार्डस का आज स्थापना दिवस है। एनएसजी आज अपना 34वां स्थापना दिवस मना रहा है। एनएसजी भारत की स्पेशल फोर्स में से एक है, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है, जिसका मुख्य कार्य आतंकी गतिविधियों से देश के आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखना होता है। विश्व की टॉप पांच स्पेशल फोर्स में एनएसजी का नाम आता है।
एनएसजी कर्मियों को काले रंग की पोशाक के चलते उन्हें अकसर ‘ब्लैक कैट’ भी कहा जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की कमान ‘डायरेक्टर जनरल’ के पास होती है।
एनएसजी के गठन के 36 सालों में अब तक इस फोर्स ने 115 एंटी टेरेरिस्ट ऑपरेशन चलाए हैं जिसमें 60 आतंकवादियों को मार गिराये है।
क्यों और कब बनाने की ज़रूरत पड़ी
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानि एनएसजी, की स्थापना वर्ष 1984 में हुयी थी।यह वो वक्त था जब भारत के पंजाब राज्य में अलग खालिस्तान राज्य की मांग को लेकर एक आंदोलन चलाया जा रहा था। जिसकी वजह से समूचे पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो गया था। पंजाब में कानून व्यवस्था और आतंकी वारदातों को रोकने के लिए स्पेशल फोर्स की जरुरत महसूस हुई, जिसके बाद एनएसजी की स्थापना की गयी।
एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग
एनएसजी कमांडो काले रंग की ड्रेस पहनते हैं, जिसकी वजह से इन्हें ब्लैक कैट कमांडो भी कहा जाता है। एनएसजी कमांडो की शुरुआती 90 दिनों की ट्रेनिंग हरियाणा के मानेसर में होती है। इस ट्रेनिंग को पूरी करने वाले सैनिकों को नौ महीने की और ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके तहत उन्हे 26 पैमानों पर खरा उतरना होता है। इस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें ऊंचाई से छलांग लगाने के साथ तनाव के दौरान कार्य करने, निशाना लगाना की ट्रेनिंग दी जाती है। एनएसजी कमांडो को पार्कर और पेक्की-तिरसिया काली की तर्ज पर प्रशिक्षित किया हैं, जो कि फिलीपींस के मार्शल आर्ट का एक रूप है। नौ माह की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन्हें अगले दौर की ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग इनती कठिन होती है कि इसमें करीब 50 से 70 फीसद सैनिक बाहर निकल जाते हैं। एनएजी कमांडो को सीधे सिर पर गोली मारने की ट्रेनिंग दी जाती है।
नेशनल सिक्योरिटी गार्डस फोर्स की संरचना
एनएसजी को जर्मनी की जीएसजी-9, बार्डर गार्ड ग्रुप की तर्ज पर बनाया गया है। जीएसजी-9 को आतंक विरोधी कार्रवाई के लिए विश्व की सबसे आला दर्जे की स्पेशल फोर्स माना जाता है। एनएसजी में भर्ती पूरी तरह से डेपुटेशन पर होती है। सेना के लोगों के लिए डेपुटेशन की 2-3 साल के बीच होती है। पैरामिलिटरी फोर्सेज के लोगो के लिए यह अवधि 2-5 साल के बीच होती है। एनएसजी कमांडो को दो समूहों स्पेशल एक्शन ग्रुप और स्पेशल रेंजर्स ग्रुप में बांटा जाता है। स्पेशल एक्शन ग्रुप में 54 फीसद सैनिक शामिल किये जाते है और बाकी एनएसजी कमांडो को केंद्रीय पुलिस संगठन, सीआरपीएफ, बीएसफ और इंडो तिब्बतन बार्डर पुलिस और रैपिड एक्शन पुलिस के साथ साझा कार्रवाई के लिए रखा जाता है।
एनएसजी की स्थापना के बाद से ही NSG ने अपने हर मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया है। NSG का मुख्य काम एंटी हाईजैक और एंटी टेररिज्म और वीआईपी लोगों की सुरक्षा करना है। NSG का हेडक्वार्टर गुरुग्राम में स्थित है. मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमला हुआ। आतंकवादियों को खत्म करने के लिए NSG कमांडो को भेजा गया। मुंबई हमलो के बाद NSG कमांडो को अन्य शहरो में भी नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स फाॅर्स के सेंटर बनाने की बात को महसूस किया गया। राजधानी दिल्ली के अलावा कोलकाता,हैदराबाद,चेन्नई और मुंबई में NSG के सेंटर बनाये गए।
गांधीनगर अक्षरधाम मंदिर हमला -
सितम्बर 2002 में गुजरात के गांधीनगर स्थित अक्षरधाम मंदिर में आतंकवादी हमला किया था। गुजरात के गांधीनगर स्थित अक्षरधाम मंदिर पर 24 सितंबर 2002 को दो बंदूकधारियों ने हमला किया था। हमले में 30 लोगों की मौत हो गयी थी, जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल हो गये थे। हालांकि अगर एनएसजी कमांडो को सही वक्त पर नहीं उतारा गया होता, तो मृतकों की संख्या ज्यादा हो जाती। एनएसजी कमांडो ने मंदिर पर हमला करने वाले दोनों आतंकवादियों को मार गिराया गया था।
मुंबई 26/11 हमला - 
मुंबई में 26 नवंबर को हुए आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 164 लोगों की मौत हो गयी थी, जबकि 308 लोग मारे गये थे। पाक प्रयोजित इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद है। उसकी अगुवाई में मुंबई के छह स्थानों पर आतंकी हमले किये गये। इनमें ताज होटल, कामा अस्पताल, ओबेराय ट्रिडेंट अस्पताल, रेल टर्मिनल, लियोपोल्ड कैफे और मुंबई चबद हाउस शामिलि थे। आतंकियों के खिलाफ एनएसजी की ओर से ऑपरेशन ब्लैक टार्नेडो चलाया गया और सभी नौ आतंकियों को मार गिराया गया और एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया। हालांकि इस ऑपरेशन में एनएसजी के एक कमांडो संदीप उन्नीकृष्णनन और गजेंद्र सिंह बिष्ट को जान गवानी पड़ी।
पठानकोट एयरबेस हमला - 
जनवरी के पहले हफ्ते में पंजाब स्थित एयरफोर्स बेस पर आतंकवादियों के हमला किया।एयरबेस पर हमले में शामिल आतंकवादियों के खात्मे के लिए NSG कमांडो को पठानकोट भेजा गया। NSG ने अन्य सुरक्षा कर्मियों के साथ हमले में शामिल सभी आतंकवादियों को मार गिराया।
उत्कृष्टता को अपनाना ।
आगे आकर नेतृत्व करना ।
शून्य त्रुटि ।
गति, चौंकाना, छिपाव, सुस्पष्टता और सटीकता इसके प्रमाण-चिन्ह हैं ।

कर्पूरी ठाकुर

 कर्पूरी ठाकुर

* कर्पूरी ठाकुर भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री थे
* लोकप्रियता के कारण उन्हें जन-नायक कहा जाता था
* 24 जनवरी, 1924 को समस्तीपुर के पितौंझिया (अब कर्पूरीग्राम) में जन्मे कर्पूरी ठाकुर बिहार में एक बार उपमुख्यमंत्री, दो बार मुख्यमंत्री और दशकों तक विधायक और विरोधी दल के नेता रहे
* 1952 की पहली विधानसभा में चुनाव जीतने के बाद वे बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे
* राजनीति में इतना लंबा सफ़र बिताने के बाद जब वो मरे तो अपने परिवार को विरासत में देने के लिए एक मकान तक उनके नाम नहीं था। ना तो पटना में, ना ही अपने पैतृक घर में वो एक इंच जमीन जोड़ पाए।
* जब करोड़ो रुपयों के घोटाले में आए दिन नेताओं के नाम उछल रहे हों, कर्पूरी जैसे नेता भी हुए, विश्वास ही नहीं होता। उनकी ईमानदारी के कई किस्से आज भी बिहार में आपको सुनने को मिलते हैं
* उनसे जुड़े कुछ लोग बताते हैं कि कर्पूरी ठाकुर जब राज्य के मुख्यमंत्री थे तो उनके रिश्ते में उनके बहनोई उनके पास नौकरी के लिए गए और कहीं सिफारिश से नौकरी लगवाने के लिए कहा। उनकी बात सुनकर कर्पूरी ठाकुर गंभीर हो गए। उसके बाद अपनी जेब से पचास रुपये निकालकर उन्हें दिए और कहा, “जाइए, उस्तरा आदि ख़रीद लीजिए और अपना पुश्तैनी धंधा आरंभ कीजिए।”
* एक दूसरा उदाहरण है, कर्पूरी ठाकुर जब पहली बार उपमुख्यमंत्री बने या फिर मुख्यमंत्री बने तो अपने बेटे रामनाथ को खत लिखना नहीं भूले। इस ख़त में क्या था, इसके बारे में रामनाथ कहते हैं, “पत्र में तीन ही बातें लिखी होती थीं- तुम इससे प्रभावित नहीं होना। कोई लोभ लालच देगा, तो उस लोभ में मत आना। मेरी बदनामी होगी।”
* रामनाथ ठाकुर इन दिनों भले राजनीति में हों और पिता के नाम का फ़ायदा भी उन्हें मिला हो, लेकिन कर्पूरी ठाकुर ने अपने जीवन में उन्हें राजनीतिक तौर पर आगे बढ़ाने का काम नहीं किया
* प्रभात प्रकाशन ने कर्पूरी ठाकुर पर ‘महान कर्मयोगी जननायक कर्पूरी ठाकुर’ नाम से दो खंडों की पुस्तक प्रकाशित की है। इसमें कर्पूरी ठाकुर पर कई दिलचस्प संस्मरण शामिल हैं
* उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता हेमवती नंदन बहुगुणा ने अपने संस्मरण में लिखा, “कर्पूरी ठाकुर की आर्थिक तंगी को देखते हुए देवीलाल ने पटना में अपने एक हरियाणवी मित्र से कहा था- कर्पूरीजी कभी आपसे पांच-दस हज़ार रुपये मांगें तो आप उन्हें दे देना, वह मेरे ऊपर आपका कर्ज रहेगा। बाद में देवीलाल ने अपने मित्र से कई बार पूछा- भई कर्पूरीजी ने कुछ मांगा। हर बार मित्र का जवाब होता- नहीं साहब, वे तो कुछ मांगते ही नहीं।"
* कर्पूरी के 'कर्पूरी ठाकुर' होने की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। वशिष्ठ नारायण सिंह लिखते हैं, समाजवादी नेता रामनंदन मिश्र का समस्तीपुर में भाषण होने वाला था, जिसमें छात्रों ने कर्पूरी ठाकुर से अपने प्रतिनिधि के रूप में भाषण कराया। उनके ओजस्वी भाषण को सुनकर मिश्र ने कहा कि यह कर्पूरी नहीं, ‘कर्पूरी ठाकुर’ है और अब इसी नाम से तुम लोग इसे जानो और तभी से कर्पूरी, कर्पूरी ठाकुर हो गए
* कर्पूरी ठाकुर का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था, जो जन्मतिथि लिखकर नहीं रखते और न फूल की थाली बजाते हैं
* 1924 में नाई जाति के परिवार में जन्मे कर्पूरी ठाकुर की जन्म तिथि 24 जनवरी 1924 मान ली गई
* स्कूल में नामांकन के समय उनकी जन्म तिथि 24 जनवरी 1924 अंकित हैं
* बेदाग छवि के कर्पूरी ठाकुर आजादी से पहले 2 बार और आजादी मिलने के बाद 18 बार जेल गए
* ये कर्पूरी ठाकुर का ही कमाल था कि लोहिया की इच्छा के विपरीत उन्होंने सन् 1967 में जनसंघ-कम्युनिस्ट को एक चटाई पर समेटते हुए अवसर और भावना से सदा अनुप्राणित रहने वाले महामाया प्रसाद सिन्हा को गैर-कांग्रेसवाद की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में पहल की और स्वयं को परदे के पीछे रखकर सफलता भी पाई
* किसी को कुछ लिखाते समय ही कर्पूरी ठाकुर को नींद आ जाती थी, तो नींद टूटने के बाद वे ठीक उसी शब्द से वह बात लिखवाना शुरू करते थे, जो लिखवाने के ठीक पहले वे सोये हुए थे
* वे राजनीति में कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक चालों को भी समझते थे और समाजवादी खेमे के नेताओं की महत्वाकांक्षाओं को भी। वे सरकार बनाने के लिए लचीला रूख अपना कर किसी भी दल से गठबंधन कर सरकार बना लेते थे, लेकिन अगर मन मुताबिक काम नहीं हुआ तो गठबंधन तोड़कर निकल भी जाते थे
* यही वजह है कि उनके दोस्त और दुश्मन दोनों को ही उनके राजनीतिक फ़ैसलों के बारे में अनिश्चितता बनी रहती थी
* कर्पूरी ठाकुर का निधन 64 साल की उम्र में 17 फरवरी, 1988 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ था
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विश्व खाद्य दिवस (World Food Day)

 विश्व खाद्य दिवस (World Food Day)

* 'विश्व खाद्य दिवस' प्रत्येक वर्ष '16 अक्टूबर' को मनाया जाता है
* यह दिवस विश्व में लोगों को खाद्यान्न की महत्ता समझने और उसकी बर्बादी रोकने के लिए प्रेरित करता है
* विश्व खाद्य दिवस संयुक्त राष्ट्र संघ की 1945 में खाद्य एवं कृषि संगठन के स्थापना दिवस 16 अक्टूबर के सम्मान में 1980 से विश्वभर में प्रतिवर्ष मनाया जाता है
* इसके अतिरिक्त वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष द्वारा भी इसे व्यापक रूप से मनाया जाता है
* इस दिवस का मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए विकासशील देशों के मध्य तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग बढ़ाना और विकसित देशों से आधुनिक तकनीकी मदद उपलब्ध कराना है
* 'संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन' के अनुसार 2002 की तुलना में खाद्यान्नों की कीमतों में 140 प्रतिशत की भारी-भरकम वृद्धि हुई है इसकी वजह से दिसम्बर 2007 से 40 देशो को खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ रहा है
* इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) की ओर से वैश्विक भूख सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) पर (2017) जारी ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के 119 विकासशील देशों में भूख के मामले में भारत 100वें स्थान पर है इससे पहले 2016 की रिपोर्ट में भारत 97वें स्थान पर था
* विश्व में आज भी कई लोग ऐसे हैं, जो भूखमरी से जूझ रहे हैं इस मामले में विकासशील या विकसित देशों में किसी तरह का कोई फ़र्क़ नहीं है
* दुनिया में एक तरफ़ तो ऐसे लोग हैं, जिनके घर में खाना खूब बर्बाद होता है और फेंक दिया जाता है वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जिन्हें एक समय का भोजन भी नहीं मिल पाता
* खाद्यान्न की इसी समस्या को देखते हुए '16 अक्टूबर' को हर साल 'विश्व खाद्य दिवस' मनाने की घोषणा की गई थी
* भारत में आज भी 19 करोड़ लोग भूखे पेट सोते हैं जबकि यहां खाद्यान्न की कोई विशेष कमी नहीं है यहां हर दिन बड़ी मात्रा में भोजन बर्बाद होता है

लच्छू महाराज (तबला वादक)

 लच्छू महाराज (तबला वादक)

* लच्छू महाराज भारत के विश्व प्रसिद्ध तबला वादक है
* लच्छू महाराज का असली नाम लक्ष्मी नारायण सिंह था
* लच्छू महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के बनारस में 16 अक्टूबर 1944 को हुआ था
* लच्छू महाराज ने अपने तबला वादन के लिए देश-विदेश में नाम कमाया साथ ही उन्होंने कई बॉलिवुड फिल्मों में काम किया था
* उन्होंने कई प्रसिद्ध फिल्मों के लिए कोरियोग्राफी भी की है. 'महल (1949)', 'मुगल-ए-आजम (1960)', 'छोटी छोटी बातें (1965)' और 'पाकीजा (1972)' जैसी फिल्मों में वह जुड़े
* जब वो सिर्फ 8 साल के थे तो उन्होंने पहली परफॉर्मेंस मुंबई में दी थी
* इमरजेंसी के दौरान महाराज ने जेल के अंदर विरोध के लिए तबला बजाया था
* उन्हें 1957 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड दिया गया था यह परफॉर्मिंग आर्टिस्ट को दिया जानेवाला सबसे बड़ा अवॉर्ड माना जाता है
* लच्छू महाराज ने पद्मश्री से लेकर कई अवॉर्ड लेने से मना कर दिया था
* पद्मश्री अवॉर्ड उन्होंने यह कह कर लेने से मना कर दिया था कि मेरे लिए दर्शकों की तालियां ही सम्मान है
* उनके पिता का नाम वासुदेव महाराज था
* लच्छू महाराज कुल 12 भाई-बहन थे सभी भाई-बहनों में वह चौथे नंबर के थे
* लच्छू महाराज का गोविंदा से भी रिश्ता है दरअसल, लच्छू की बहन निर्मला ऐक्टर गोविंदा की मां हैं
* लच्छू ने फ्रेंच महिला टीना से शादी की थी, जिनसे उनकी एक बेटी है, जिसका नाम नारायणी है
* लच्छू महाराज पूर्वी राग के अलावा 4 तबला घरानों की तबला शैली में भी निपुण थे
* देश ही नहीं दुनिया के कई बड़े मंच पर उन्होंने तबला वादन से लोगों का दिल जीता है
* लच्छू महाराज ने कभी किसी की फरमाइश पर तबला नहीं बजाया वह अपने मन से तबला वादन करते थे
* लंबे समय तक बीमार रहने के बाद 27 जुलाई 2016 को वाराणसी में लच्छू महाराज का निधन हो गया
* आखिरी समय में उन्होंने कहा था- 'कल देखना गुरु, संगीत से एक आदमी नहीं आएगा कि लच्छू मर गया.'
* लच्छू महाराज के प्रदर्शन को देखकर महान तबला वादक अहमद जान थिरकवा मंत्रमुग्ध हो गए थे. उन्होंने कहा था- 'काश लच्छू मेरा बेटा होता.'
* 2018 में उनके जन्मदिन पर Google Doodle में गूगल ने अपने होम पेज पर लच्छू जी महाराज की एक पेंटिंग बनाई है इसमें लच्छू जी महाराज गाते और तबला बजाते दिख रहे हैं
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केदार पांडे

 

केदार पांडे

* केदार पांडे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ तथा बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे
* वह 19 मार्च 1972 से 2 जुलाई 1973 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे
* केदार पांडे के पिता का नाम पंडित रामफल पांडे था
* इनका जन्म तौला गाँव, पश्चिम चंपारण जिला में 14 जून, 1920 को हुआ था
* इनकी शिक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में हुई और यहाँ उन्होंने एमएसी तथा एलएलबी की पढ़ाई की
* इनका विवाह कमला पांडे के साथ 6 जून, 1948 को हुआ
* इनके दो पुत्र तथा दो पुत्रियाँ थीं
* केदार पांडे ने 1967 में पहली बार चुनाव जीता और इसके बाद 1980 तक लगातार 4 बार चुनाव जीते
* वह 1972 में करीब 15 महीने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने
* बाद में इंदिरा गांधी के अंतिम कार्यकाल के दौरान 12 नवंबर 1980 से 14 जनवरी 1982 तक रेल मंत्री भी रहे
* इनका निधन 3 जुलाई 1982 को हुआ था

डायनासोर (Dinosaur)

 डायनासोर (Dinosaur)

* आज से 23 करोड़ साल पहले डायनासोर का जन्म हुआ और आज से 6.5 करोड़ साल पहले आखिरी डायनासोर की मौत हुई
* डायनासोरों की पढ़ाई करने वाले आदमी को ‘Paleontologist’ कहते है
* डायनासोर धरती पर 16 करोड़ साल तक रहे इंसानो का जीवन इसका केवल 0.1% है
* डाय़नासोर जिस काल में धरती पर जीवित थे उसे ‘Mesozoic era’ कहा जाता है ये इस युग के तीनों भागों में जीवित रहे Triassic, Jurassic, and Cretaceous
* ऐसा माना जाता है कि उस समय डायनासोरों की लगभग 2468 प्रजातियाँ थी इनमें से कुछ उड़ती भी थी
* ‘Dinosaur’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘terrible lizard’ से आया है जिसका अर्थ होता है भयानक छिपकली
* ‘डायनासोर’ शब्द 1842 में एक ब्रिटिश जीवाश्म विज्ञानी रिचर्ड ओवेन ने दिया था
* डाय़नासोर दहाड़ नही सकते थे, ये सिर्फ मुंह बंद करके घुरघुरा सकते थे
* गुजरात की नर्मदा नदी के किनारे भी डायनासोर के अवशेष मिले है ये करीब 7 करोड़ साल पुराने है
* इस बात का पक्का सबूत तो नही है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि डायनासोर लगभग 200 साल तक जीते थे
* DNA केवल 20 लाख साल तक जीवित रह सकता है इसलिए डायनासोर के जीवाशम का DNA टेस्ट नही किया जा सकता
* जो डाय़नासोर पानी के नजदीक थे उसके सबसे अच्छे अवशेष मिले है
* मांस खाने वाले डायनासोर को ‘थेरोपोड’ कहा जाता है मतलब ‘राक्षसी पंजो वाले’ इनके खुर और नाखून तेज होते थे बल्कि शाकाहरी डायनासोर के पंजे और नाखून तेज नही थे
* शाकाहारी डायनासोर ठंडे खून के थे, कुछ बड़े आकार वाले शाकाहारी रोज एक टन खाना खाते थे मतलब, एक बड़ी बस के गठ्ठर (bundle) के बराबर
* मांसाहारी डायनासोर गर्म खून के थे और ये अपने साइज के शाकाहारियों से 10 गुना ज्यादा भोजन खा जाते थे
* डायनासोरों की हड्डियाँ खोखली होती थी, खासकर मांसाहारी डायनासोरों की. ताकि इनका वजन हल्का बना रहे
* ये दो पैरो पर चलते थे ताकि ये तेजी से भाग सके और दोनों हाथो से शिकार कर सके
* शाकाहारी डाय़नासोर अपने भारी शरीर को चलाने के लिए चार पैरों पर चलते थे ये सिर्फ कुछ समय के लिए ही दो पैरों पर संतुलन बना पाते थे
* सबसे बड़े डायनासोर के अंडे बाॅस्केट बाॅल जितने बड़े होते थे जितना बड़ा अंडा, उतना ही मोटा उसका कवच ताकि बच्चे बाहर ना आ सके
* अब तक मिले सबसे छोटे डायनासोरी अंडे की लंबाई 3 cm और वजन 75 gram है ये अंडा किस प्रजाति का था किसी को नही पता
* सबसे बड़ा डायनासोरी अंडा 19 इंच की लंबाई का मिला है ऐसा माना जाता है कि यह एशिया के मांसाहारी डायनासोर का है
* डायनासोर की सभी प्रजातिया अंडे देती थी. अभी तक 40 प्रजातियों के अंडे मिल चुके है
* अधिकत्तर डायनासोर सिर्फ एक हड्डी या एक दाँत से खोजे गए है
* डाय़नासोर, अंटार्कटिका सहित हर महाद्वीप पर पाए गए है लेकिन उस समय महाद्वीप एक-दूसरे के नजदीक हुआ करते थे
* डायनासोर पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े निगल जाते थे ये इनके पेट में रहकर भोजन पचाने में सहायता करते थे
* 45 फीट लंबे और 6350 किलो वजनी, T. Rex  (Tyrannosaurus rex) सबसे बड़े मांसाहारी डायनासोर थे
* T. Rex के पिछले पैर बहुत बड़े-बड़े होते थे लेकिन अगले हाथ बिल्कुल छोटे-छोटे मतलब, आज के आदमियों जितने
* T. Rex के बड़े-बड़े दाँत होते थे जिनकी लंबाई जड़ समेत 10 इंच थी मतलब, iPad जितनी
* T. Rex के 4 फीट लंबे जबड़े में 50 से 60 दाँत होते थे ये काट सकते थे लेकिन शिकार को चबाते नही थे बल्कि सीधा निगल जाते थे
* सभी डाय़नासोर में self-defense सिस्टम मौजूद था मतलब, अपनी सुरक्षा के लायक हथियार जन्म से उनके पास होते थे
* मांसाहारी के दांत और नाखून लंबे होते थे शाकाहारी के सींग और चौड़े पंजे होते थे
* आज तक कोई ये नही जान पाया की डायनासोर की पीठ पर प्लेट क्यों होती थी
* 2015 में, एक 4 साल के बच्चे ने 10 करोड़ साल पुराने डायनासोर का जीवाश्म खोजा
* यदि धरती के इतिहास को 24 घंटो का बना दिया जाए तो सुबह 4:00 बजे जीवन शुरू हुआ, रात 10:24 पर पेड़-पौधे उगने शुरू हुए, 11:41 पर डायनासोर विलुप्त हो गए, और रात 11:58:43 पर इंसान का जन्म हुआ
* कुछ डायनासोर की पूंछ 45 मीटर लंबी थी ये लंबी पूँछ भागते समय बैलेंस बनाने में मदद करती थी
* मध्य चीन में ग्रामीण कई साल तक डायनासोरों की हड्डियों को दवा के रूप में प्रयोग करते रहे वे इन्हें ड्रैगन की हड्डियाँ मानते थे
* कुछ लोगो ने इनको इकट्ठा करके व्यापार बना लिया था एक मि. झांग नाम के आदमी ने 8,000 किलो हड्डियाँ इकट्ठी कर ली थी
* सबसे तेज डायनासोर थे ‘Ornithomimus’ ये 70km/h की रफ्तार से दौड़ सकते थे ये हूबहू आज के शुतुरमुर्ग की तरह दिखते थे ये खाते क्या थे आज भी रहस्य है
* अब तक खोजे गए सबसे बड़े डाय़नासोर के कंकाल की लंबाई 89 फीट है इसका नाम रखा गया ‘Diplodocus’ ये अमेरिका के व्योमिंग शहर में मिला था
* सबसे छोटे डायनासोर के कंकाल की लंबाई केवल 4 इंच है और इसका वजन एक चुहिया से भी कम रहा होगा इसे हम शाॅपिंग बैग में भी डाल सकते थे
* बोलविया में एक चूना पत्थर की चट्टान पर डायनासोरों के पाँवो के 5,000 निशान पाये गए है, ये निशान करीब 6 करोड़ 80 लाख पुराने है
* ये मजेदार तथ्य है की फिल्म का नाम ‘Jurassic Park’ होने के बावजूद इसमें ज्यादात्तर डाय़नासोर ‘Cretaceous’ काल के थे
* जुरासिक पार्क फिल्म में डायनासोरो की जो आवाज निकाली गई है वह दरअसल सेक्स करते हुए कछुओं की आवाज है
* डायनासोर एकदम से खत्म इसलिए हुए, क्योंकि आज से 6.5 करोड़ साल पहले मैक्सिको के युकैटन प्रायद्वीप से एक 6 मील व्यास वाला उल्का पिंड टकराया था
* इस टकराव से 112 मील चौड़ा गढ्ढा बन गया इसकी वजह से बहुत तेज शाॅकवेव पैदा हुई जो पूरी धरती पर फैल गई इससे जो जानवर कुत्ते से बड़े आकार के थे वो सब खत्म हो गए हालांकि, शार्क, जेलिफ़िश, मछली, बिच्छू, पक्षी, कीड़े, सांप, कछुआ, छिपकली, और मगरमच्छ जैसे जानवरों की जान बच गई

आर. के. शनमुखम चेट्टी (अर्थशास्त्री)

 आर. के. शनमुखम चेट्टी (अर्थशास्त्री)

* सर रामासामी चेट्टी कंदासामी शनमुखम चेट्टी एक भारतीय अधिवक्ता, अर्थशास्त्री तथा राजनेता थे
* ये 1947 से 1949 तक स्वतंत्र भारत के प्रथम वित्त मंत्री रहे
* उन्होंने 1933 से 1935 तक भारत की केन्द्रीय विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में, और 1935 से 1941 तक कोचीन राज्य के दीवान के रूप में भी कार्य किया
* शनमुखम चेट्टी का जन्म 17 अक्टूबर 1892 में कोयंबटूर में हुआ था
* उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज और मद्रास लॉ कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की
* अपनी शिक्षा पूरी होने पर, शनमुखम चेट्टी जस्टिस पार्टी में शामिल हो गए और 1917 में कोयंबटूर नगरपालिका के पार्षद चुने गए
* 1920 में जस्टिस पार्टी के टिकट पर उन्होंने मद्रास विधानसभा के लिए चुनाव लड़ा, जिसमें वह विजयी हुए, हालाँकि 1922 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया
* चेट्टी स्वराज पार्टी से जुड़े, और 1924 में भारत की केन्द्रीय विधान सभा के लिए चुने गये
* 1932 में उन्हें सभा के उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया, और फिर 1933 में वह सभा के अध्यक्ष भी बन गए
* 1935 के चुनावों में पराजित होने पर चेट्टी वापस दक्षिण भारत लौट आए, जहां उन्होंने 1935 से 1941 तक उन्होंने कोचीन राज्य के दीवान के रूप में कार्य किया
* 1947 में भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात, भारत के प्रथम प्रधान मंत्री, जवाहरलाल नेहरू ने चेट्टी को अपने वित्त मंत्री के रूप में चुना
* चेट्टी को 26 नवंबर 1947 को स्वतंत्र भारत का पहले बजट पेश करने के लिए भी याद किया जाता है
* 5 मई 1953 को ह्रदय गति रुक जाने के कारण शनमुखम चेट्टी की मृत्यु हो गई
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राष्ट्रीय_सुरक्षा_गार्ड

 # राष्ट्रीय_सुरक्षा_गार्ड #३६वां_स्थापना_दिवस #१५_अक्टूबर_२०२० ३६ साल से सर्वत्र, सर्वोत्तम सुरक्षा में तैनात NSG कमांडो, देश को है नाज ❤️...